Central University of Kerala

Central University of Kerala Schools Languages And Comparative Literature Department of Hindi
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हिन्दी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग

केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी व तुलनात्मक साहित्य विभाग की स्थापना 2011  में और कक्षाओं का नियमित संचालन2012 में तत्कालीन कुलपति प्रो. जेम्सी जेम्स के कार्यकाल में प्रारंभ हुआ। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय तथा अन्य विश्वविद्यालयों की सहभागिता से शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक कार्यक्रमों में छात्रों की प्रतिभा लक्षित करता है। इसकी स्थापना के साथ ही अध्ययन-अध्यापन में हिन्दी भाषा, साहित्य व तुलनात्मक साहित्य को मुख्य विषय के रूप में तथा अन्य वैकल्पिक विषयों में तकनीकी, संगणकीय, प्रयोजनमूलक हिन्दी में अध्ययन-अध्यापन करते हुए हिन्दी के छात्रों के अतिरिक्त अन्य विभागों के छात्रों को भी वैकल्पिक विषय चुनकर पढ़ने का अवसर प्रदान करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। विभाग में अक्तूबर 2012 से डॉ. जोसफ कोयिपल्लि के निर्देशन में नियमित कक्षायें प्रारंभ हुई और इसके अंतर्गत छात्रों के लिए परिसंवाद, कौशल विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि चलाने के साथ-साथ कवि, कलाकार, लेखक आदि से साक्षात्कार कराएं जाने और भाषा प्रयोगशाला की सहायता से भाषा-विकास कार्यक्रम भी यहाँ संपन्न होते रहे हैं। डॉ. जोसफ कोयिपल्लि की अध्यक्षता में तीन राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ सात दिवसीय नव लेखन शिविर का आयोजन किया जा चुका है। त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘द इम्पेक्ट ऑफ नेशनल मूवमेंट ऑन इण्डियन लिटरेचर’ चलाई गई जिसके संयोजक डॉ. सी.पी.वी विजयकुमारन तथा विभागाध्यक्ष डॉ. जोसेफ़ कोयिपल्ली रहे। 28 सितंबर 2014 को हिन्दी पखवाड़ा समारोह का भी आयोजन हुआ जिसके संयोजक डॉ. विजयकुमारन सी. पी. वी तथा निदेशक डॉ. टी. के. अनीश कुमार (राजभाषा अधिकारी) रहे। यह कार्यक्रम केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में हिन्दी विभाग ने चलाया था। इसी दौरान डॉ. आर सुरेन्द्रन, डॉ. जीतेंद्र गुप्ता, श्रीमती शिल्पी गुप्ता, डॉ. राकेश कुमार सिंह, श्री बाबूलाल भारती अतिथि प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे। यहाँ अध्यापन के दौरान डॉ. आर० सुरेन्द्रन को साहित्य अकादमी तथा विश्व भारती राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। विभाग के दूसरे प्रभारी डॉ. प्रसाद पन्नयन हुए।

अपने शुरूआती दौर में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक अनुभव संपन्न पाँच अध्यापक उक्त विभाग में कार्यरत हैं। देश के अन्य विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ नियमित रूप से यहाँ पढ़ाने के लिए आमंत्रित किए जाते हैं।20 नवम्बर 2015 को विभाग में पहली स्थाई नियुक्ति के रूप में उपाचार्य डॉ. उमेश कुमार सिंह आये जिन्हें महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में 10 वर्ष से अधिक के अध्यापन का अनुभव प्राप्त था और वे हिन्दी विभाग के प्रथम अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ पर विशेष व्याख्यान हुआ जिसकी संयोजिका डॉ. सुप्रिया पी रहीं। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में कालीकट विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. टी. एन. विश्वम्भरन ने अपना वक्तव्य दिया।

डॉ. उमेश कुमार सिंह के उपरांत डॉ. सीमा चन्द्रन ने 11 मई 2016 से 12 जून 2016 तक तथा 12 जुलाई से 28 अगस्त 2016 तक हिन्दी विभाग का कार्यभार प्रभारी अध्यक्ष के रूप में संभाला। डॉ. सीमा चंद्रन के निर्देशन में एम.ए. छात्रों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम 20 जुलाई 2016 को चलाया गया। विभाग में पहली बार पीएच.डी प्रवेश परीक्षा का आयोजन हुआ और विभाग में छः शोध छात्रों ने प्रवेश लिया। 29 जुलाई 2016 में प्रेमचंद जयंती के अवसर पर ‘विशेष गोष्ठी’ चलाई गई जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में आकाशवाणी दिल्ली के निदेशक राजेन्द्र उपाध्याय के वक्तव्य प्रेमचंद का कथा साहित्य और परवर्ती साहित्य पर प्रभाव’ से छात्र लाभान्वित हुए। इस कार्यक्रम के संयोजक विभाग के सहायक आचार्य डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह रहे। 19 अगस्त 2016 को पीएच.डी कोर्स वर्क के पाठ्यक्रम से सम्बंधित“शोध प्रविधि और तुलनात्मक साहित्य” पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला चलाई गयी जिसकी संयोजिका डॉ. सीमा चन्द्रन रहीं। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. तारु एस. पवार जी थे। इसमें विशेष वक्ता प्रो.(डॉ.) कैशाल देवी सिंह जी, लखनऊ विश्वविद्यालय ने ‘तुलनात्मक साहित्य और शोध प्रविधि’ पर विचार प्रस्तुत किए तथा प्रो.(डॉ.) मोहन जी, दिल्ली विश्वविद्यालय ने ‘शोध प्रविधि’ से छात्रों को अवगत कराया। 20 अगस्त 2016 को स्नातकोत्तर अध्ययन मण्डल (पी.जी. बोर्ड ऑफ स्टडीज़) चलाई गई। 25 अगस्त 2016 को विशेष आमंत्रित व्याख्यान ‘रंग परिदृश्य और हिन्दी नाटक’ विषय पर आयोजित हुआ जिसमें विशेष वक्ता के रूप में डॉ. टी.ए आनंद जी ने व्याख्यान दिया। 

5 अगस्त2014 को डॉ. तारु एस. पवार ने हिंदी विभाग में उपाचार्य का पद ग्रहण किया । 7 सितम्बर 2016 से 28 सितम्बर 2016 के मध्य हिंदी पखवाड़े का आयोजन केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो. (डॉ) जी. गोप कुमार की अध्यक्षता में किया गया जिसके मुख्य अतिथि प्रो. एन. रविंद्रनाथ थे।कार्यक्रम उपाध्यक्ष डॉ. तारु एस. पवार और संयोजक हिंदी अधिकारी श्री अनीश कुमार रहे। डॉ. सीमा चंद्रन और डॉ. रामबिनोद रे के निर्देशन में अनेक प्रतियोगिताएं चलाई गयी तथा विद्यार्थियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए।

डॉ. तारु एस. पवार ने 29 अगस्त 2016
को अध्यक्ष के रूप में कार्यभार सँभाला। विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो. (डॉ.) जी० गोप कुमार के संरक्षण और विभागाध्यक्ष डॉ. पवार जी के निर्देशन में सहायक आचार्य डॉ. सीमा चंद्रन, डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. राम बिनोद रे,डॉ. सुप्रिया पी और कार्यालय सहायक श्रीजित नायर (अस्थाई) विभाग आगे बढ़ाने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं।


मिशन (Mission) 

  •   केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग का उद्गम केवल प्रचार-प्रसार करना ही नहीं बल्कि हिन्दी साहित्य से अवगत करवाकर उसमें अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर अहिन्दी भाषियों को वस्तुगत ज्ञान की उन्नति की ओर ले जाना रहा है।
  • हिन्दी भाषा और तुलनात्मक साहित्य के अध्ययन से विशेष मानवीय मूल्य, सामाजिक ज्ञान, विज्ञान तथा तकनीक का सही परिचय मिलता है।
  •   इसे पढ़ने और पढ़ाने की क्रिया द्वारा मनुष्य के आन्तरिक अनुशासन में नवीनता के नाप-तोल की सही उन्नति होती है।
  • इस तरह के साहित्य और अनुसंधान द्वारा देश के विकास के लिए मानवशक्ति का प्रशिक्षण मिलता है। इसके साथ ही अनुसंधान जीविकोपार्जन की ओर उन्मुख होता है।
  • इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यवहार-व्यापार का सही उपयोगी ज्ञान मिलता है जो आज वैश्वीकरण के युग में अत्यंत आवश्यक है।
  • इस विशेष उन्नति के कारण मनुष्य सामाजिक एवं अर्थ की दृष्टि से भी सुधार कर सकता है।

    इन्हीं प्रयोजनों की पूर्णता हिन्दी विभाग, केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय का ध्येय रहा है। इसी को पूर्व योजनानुसार करने का प्रयास किया जा रहा है।
लक्ष्य :
  •   विभागीय पुस्तकालय की स्थापना और शोध पत्रिका का नियमित प्रकाशन\
  •   हिन्दी भाषा और उच्चारण विज्ञान पर आधारित प्रयोगशाला का निर्माण

  •   मलयालम, कन्नड़, तेलगु, मराठी, पंजाबी, बंगाली आदि भाषा का अध्ययन-अध्यापन और शोध कार्य

  • प्रवासी साहित्य का अध्ययन-अध्यापन

  • विश्व भर की संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से सकर्मक जुड़ाव

  • विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हिन्दी विषय के विद्यार्थियों तथा हिन्दी विभाग के विद्यार्थियों का विदेशी विश्वविद्यालयों में भाषिक अध्ययन हेतु पारस्परिक आदान-प्रदान करना
  • उत्तर आधुनिक विमर्शों पर अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन
    $1Ø  अन्तरराष्ट्रीय स्तर तथा अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं सौहार्द हेतु तुलनात्मक अध्ययन शोध एवं संगोष्ठियों के द्वारा सेतुनिर्मित करना

  • वेब पोर्टल पर हिन्दी की विश्वोपयोगी पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद उपलब्ध करवाना
  •   एक विशाल पोर्टल और बहुभाषी वेबसाइट उपलब्ध करवाना

  • प्रत्येक तीन वर्ष में पाठ्यक्रम नवीनीकरण
  •   जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स, प्रयोजनमूलक हिन्दी और अनुवाद में स्नातकोत्तर (दो वर्षीय पाठ्यक्रम) और अनुवाद दक्षताप्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

  • अभावग्रस्त संस्थाओं की हिन्दी विकास में सहयोग प्रदान करना

 

 

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